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हकीकत और ख्वाब

Mamta krishna

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हकीकत से जब
        
                                                    
                            
टकराती है ख्वाब,
ख्वाबों की हकीकत
टूटती है रूबाब।
पंख कुतरे
बिखरे ज़मीं पर,
हैसियत जब
बतलाती है ख्वाब।।
3 महीने पहले
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