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मरते रहे हैं हम

Mamta Khurana

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुझ पर भरोसा बार बार करते रहे हम,
        
                                                    
                            
ये दिल टूटा ज़ार-ज़ार मरते रहे हम।।

तुझ पर नहीं कोई असर ए मेरे हमकदम,
चलते चलते राह में जो रुकते रहे हैं हम।

उम्मीद रख दिल मे तेरी, आह भरते रहे हैं हम,
हमारे दिल को समझो तुम,हो कभी तकदीरें रहम।

तेरी तस्वीर तेरा ख्याल मेरी आँखों मे तुम ही तुम,
तेरे लिए इस जहां का सितम सहते रहे है हम।

तू ही बड़ा नादान है, या मुझ पर है बेरहम,
करता रहता है बेवजह जो सितम पे सितम।

तेरी शिकायतें, शिकवे,गिले सभी कुछ मेरे सनम,
दिल ही दिल मे लेकर चलें जाएँगे जहां से हम।

तुझ पर भरोसा बार बार करते रहे है हम
ये दिल भी टूटा ज़ार ज़ार मरते रहे हैं हम।।

- ममता खुराना
2 वर्ष पहले
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