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कल जो साथ थे मेरे ....

Mamta 94

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल जो साथ थे
        
                                                    
                            
मेरे ....
आज अकेला पाया खुद को
पता था की ये होगा
फिर भी इस कगार मैं
लाया खुद को
गलती न थी मेरी
फिर भी उस पर
पछतावा होता है
नही पता जाने कहा मेरे मन
अक्सर खोता है
शब्दो के जाल में
फसते ही बहुत दर्द होता है
दिन बीतते जाते है
पता नही फिर इतना
दिल क्यू रोता है।
मेहफिलो में तो मैं
लाया खुद को
ये सोचकर की कोई साथ होगा
पर पता चला
कल जो साथ थे मेरे
आज अकेला पाया खुद को
2 वर्ष पहले
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