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कलम की आख़िरी गवाही

malti gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब मेरा अंतिम समय आएगा और कलम उठेगी,
        
                                                    
                            
तो मैं दुनिया के हर मुखौटे को उतार दूँगी।
ईश्वर को निर्मोही पत्थर और प्रेम को अधूरी आस लिखूँगी।
रिश्तों को कसमों के पिंजरे और सुख को मृगतृष्णा लिखूँगी।
इस संसार में सिर्फ दुख ही शाश्वत है,
इसलिए दुख को सत्य और खुद को उसी सत्य का हिस्सा लिखूँगी।
3 घंटे पहले
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