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कलम की आख़िरी गवाही

                
                                                         
                            जब मेरा अंतिम समय आएगा और कलम उठेगी,
                                                                 
                            
तो मैं दुनिया के हर मुखौटे को उतार दूँगी।
ईश्वर को निर्मोही पत्थर और प्रेम को अधूरी आस लिखूँगी।
रिश्तों को कसमों के पिंजरे और सुख को मृगतृष्णा लिखूँगी।
इस संसार में सिर्फ दुख ही शाश्वत है,
इसलिए दुख को सत्य और खुद को उसी सत्य का हिस्सा लिखूँगी।
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एक घंटा पहले

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