विज्ञापन

दे दे स्वर वीणावादिनी

Mahesh Rautela

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दे दे स्वर वीणावादिनी दे दे
        
                                                    
                            
भारत की भाषा, भारत में कर दे,
जन-जन के मन में भर दे
स्वच्छ-स्वस्थ राष्ट्र को कर दे।
सहस्र युगों को हमें दिखा दे
वीणा के स्वर सर्वत्र बहा दे,
पग-पग पवित्र पुष्प बिछा दे
जिह्वा से मधु रस बरसा दे।
संग प्यार का प्यारा दे दे
उच्च शिखर की खुशियां दे दे,
स्वच्छ-स्वतंत्र गरिमा दे दे
भारत की भाषा, भारत में रख दे।
रुग्ण मन को शौर्य सुना दे
शुष्क सुरों में प्राण जगा दे,
भारत से प्रिय बातें कर दे
भारत की बातें, भारत में भर दे।
-महेश रौतेला
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile