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शोमैन राज कपूर

mahesh balpande

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पृथ्वीराज की गोद में मचाने हुड़दंग,
        
                                                    
                            
1924 की तिथि थी, 14 दिसंबर।
मांँ रामसरनी ने दियो रे जनम,
आए राज बाबू यहाँ।

पृथ्वीराज जी के थे तीन बेटे,
शम्मी, शशि और राज थे बड़े।
सृष्टिनाथ से चलाना पड़ा काम,
सोचा था रखेंगे रणबीर राज नाम।

पढ़ाई से तोड़ के अपने रिश्ते सारे,
पिता की राह पर चला बांवरा प्यारे।
1935 में बोल इंकलाब की बोली,
उम्र 11 वर्ष में ही कियों रे कमाल।

घूमते घूमते वो आवारा पागल,
रीवा की गलियों में पहुंँचा अनाडी।
मुड़ मुड़ के देखा उसने बार-बारं,
प्यार का करने कृष्णा से इज़हार।

12 मई 1946 को कृष्णा जी को लेने।
राजा की आएगी बारात सबको बताया।
पहन के पतलुन इंग्लिस्तानी,
1948 में आग सबके दिल में लगा दी।

जब दिल का हाल सुनाने दिल वाला,
सिर पे लाल टोपी रुसी,
पैरों में पहन जापानी जूता।
बरसात में श्री 420 था निकला।

सीना ताने वो निकले जिधर से,
सबसे वो कहता नजरें मिलाके।
ऐ राज वहांँ रहता है जी बाबू,
जिस देश में गंगा बहती है प्यारें।

बढने लगी समाज में,
जब परिवारों में दूरियां।
मेरा नाम जोकर है सबको बताया,
जीना यहाँ, मरना यहांँ सिखाया।

जागते रहो का नारा देकर,
अपना एक अलग अंदाज दिखाया।
दिल से निकली थी आह जैसे,
प्यार की सरगम गाकर सुनाया।

पांँच बच्चों से थी महकी,
कृष्णा-राज की बगिया।
तीन बेटों संग घर में जन्मी,
दो नन्ही मुन्नी प्यारी परियांँ।

जन्म भले ही हुआ पेशावर में,
फिर भी दिल है हिंदुस्तानी।
सबसे सीना ताने कहकर,
अपने हिंदुस्तान का गौरव बढ़ाया।

कदम भले ही डगमगाए पल भर,
मांँ- बाप का फिर भी मान बढाया।
1948 में आर के.फिल्म स्टुडियों,
चेंबुर, मुंबई (महाराष्ट्र) में बसाया।

मान मिला, प्यारा सम्मान मिला,
पुरस्कारों की बौछार हुई।
आवारा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर,
शोमैन की अलग पहचान हुई।

भीगी-भीगी रातों में निकला अलबेला,
कहता था शोमैन उसे सारा जमाना।
उसने सबको अपना दिवाना बनाकर,
1964 में संगम पर मिलन का गीत गाया।

रणधीर,ऋषि,राजीव,रीमा व ऋतू,
वकील बाबू के पंच प्राण थे।
परवरिश पर न उठे उंगलियांँ,
2018 में अपनो ने बेचा सपनों का आशियाना।

राजेंद्र कुमार संग दोस्ती निभाई,
धरम करम की बात 1975 में बताई।
एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल,
दुनिया को यह रीत सिखाई।

एक शताब्दी बाद भी उन्होंने,
लोगों के दिल पर राज किया है।
नहीं भूलेगी यह दुनिया उनको,
जिन्होंने नीलकमल सा इतिहास रचा है।

जब से हुई राम तेरी गंगा मैली,
हो गई पराई वो दिल की रानी,
2 जून 1988 को हुई अनहोनी।
अधूरी रह गई अमर प्रेम की कहानी
- महेश
एक वर्ष पहले
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