चमक रही हैं बिजलियां नील गगन में ,
दिखा रही है दृश्य धरती का,
हे ! बादल अब तुम भी बरसो
वरना ! क्या होगा इस धरती पुत्र महारथी का ??
जो करता है भरण-पोषण इस दुनिया का बन सारथी सा,
हे बादल तुम हो मित्र सदा इसके साथ दो इसका निःस्वार्थ सा
सोचो बिन बरसे क्या होगा इस धरती पुत्र महारथी का...??
पंकज/महावीर शर्मा
नमुकिया , मालपुरा (टोंक)
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