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रे मांझी

Madhubala Maurya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक मांझी,दो राहगीर
        
                                                    
                            
एक बहुत बड़ी विशाल नाव
नदी के मध्य पहुंचकर
ठिठोली करता हुआ एक राहगीर
बिना किसी प्रयोजन के पूछता है
कि क्या तुम्हें तैरना आता है????
दूसरा राहगीर उत्तर देता है
और कहता है
कि अरे साहब पहले किनारे तक पहुंचने तो दीजिए,
दोनों राहगीर की बातचीत सुन रहा मांझी अपना किराया और अपनी हैसियत बताते हुए कमर से गमछा बांध लेता है
और देखते ही देखते
मांझी नाव से कूद कर नदी में खेलने लगा
पहले तो दोनों राहगीर
को लगा कि मांझी शायद नदी में कूद कर
बड़ी-बड़ी मछलियां पकड़ने का प्रयत्न कर रहा!!!
मगर मांझी और नाव एक दूसरे से दूर;
आहिस्ता -आहिस्ता दूर होते जा रहे हैं,
नाव पर खड़े होकर के राहगीर मांझी को सोने के थैले से भरा सिक्का दिखता है
और उसे बुलाता है
कि मुझे मंझधार से किनारे,
नदी के किनारे पहुंचा दो,
दोनों राहगीर अपना अपना प्रलोभन मांझी को दे रहे हैं
दूसरा राहगीर खेवईया लिया और नाव को किनारे की तरफ खेवने लगा,किन्तु नाव रह -रह कर
नदी के बीच में ही चक्कर लगा रहा
अब दोनों को कुछ सूझ नहीं रहा
कि इस बवंडर से उन्हें
कौन उन्हें बचाएगा!!
ऊपर से बवंडर अपना विशाल रूप लिए
नाव में प्रवेश कर रहा ¡¡¡¡¡¡
2 वर्ष पहले
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Updesh Kumar

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