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चाहत और माँ

madhepur cricket

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दिया
        
                                                    
                            
इक पन्ना रखा,जिसपे अपने माँ को उतार दिया

वो बे जुबां कलम भी खुश दिख रहा था
शियाही ने कहा तूने अपना तकदीर उतार दिया ।।

~ माधव झा

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4 वर्ष पहले
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