विज्ञापन

मां तो मां होती है

डॉ नीतू

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मां तो मां होती है,
        
                                                    
                            
मां हो या सासु मां,
अन्तर क्या है दोनों में,
आओ जाने हम तुम मिलकर||

मां ने विदा किया मायके से,
तुमने स्वागत किया सासरे में,
कुछ मां ने सिखलाया मुझको,
बहुत कुछ सिखाया तुमने||

मां ने जन्म दिया मुझको,
चलना उसने सिखलाया,
लगी सासरे में जब ठोकर,
गिरकर उठना सिखाया तुमने||

मां देती प्यार, दुलार और आशीर्वाद मुझे,
तुमने भी तो सौभाग्यवती बनाया मुझको,
संस्कार ज्ञान मिला मां से मुझको,
उन पर चलना सिखाया तुमने||

जब मैं मायके से आती हूं,
मां हर एक समान सजाती है,
पति संग जब मैं कही जाती हूं,
तुम भी तो हर समान सजोंती हो||

मैं जब भी विदा होती हूं,
मां के आंसू नदी से बहते हैं,
पति संग जब भी मैं विदेश जाती हूं,
तुम भी तो गंगा- जमुना बहाती हो||

तुम कहने को सास हो मेरी,
पर मां जैसी ही हो तुम भी,
मां वो भी है, मां तुम भी हो,
न तुम कम हो, न वो कम है||

मैंने तो तुममे मां को ही पाया,
क्योंकि
मां तो मां होती है,
मां हो या सासु मां||

स्वरचित कविता
डाॅ. नीतू पान्डेय


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

samarth dalela

2 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13066 कविताएं

View Profile