मां तो मां होती है,
मां हो या सासु मां,
अन्तर क्या है दोनों में,
आओ जाने हम तुम मिलकर||
मां ने विदा किया मायके से,
तुमने स्वागत किया सासरे में,
कुछ मां ने सिखलाया मुझको,
बहुत कुछ सिखाया तुमने||
मां ने जन्म दिया मुझको,
चलना उसने सिखलाया,
लगी सासरे में जब ठोकर,
गिरकर उठना सिखाया तुमने||
मां देती प्यार, दुलार और आशीर्वाद मुझे,
तुमने भी तो सौभाग्यवती बनाया मुझको,
संस्कार ज्ञान मिला मां से मुझको,
उन पर चलना सिखाया तुमने||
जब मैं मायके से आती हूं,
मां हर एक समान सजाती है,
पति संग जब मैं कही जाती हूं,
तुम भी तो हर समान सजोंती हो||
मैं जब भी विदा होती हूं,
मां के आंसू नदी से बहते हैं,
पति संग जब भी मैं विदेश जाती हूं,
तुम भी तो गंगा- जमुना बहाती हो||
तुम कहने को सास हो मेरी,
पर मां जैसी ही हो तुम भी,
मां वो भी है, मां तुम भी हो,
न तुम कम हो, न वो कम है||
मैंने तो तुममे मां को ही पाया,
क्योंकि
मां तो मां होती है,
मां हो या सासु मां||
स्वरचित कविता
डाॅ. नीतू पान्डेय
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