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झूमें बांसती उत्सव में ।

LS Kuntal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धरती पर छाई हरियाली, झूम रही है डाली-डाली।
        
                                                    
                            
झूम रही है पीली सरसों, झूम रहे गेहूं की बाली।।१।।

झूम रहे हैं चंचल खग दल, उड़ते नभ में ऊँचे प्रतिपल।
चहचहाते आपस में खुश हो, गुंजा रहे बोली से नभ-थल।।२।।

झूम रही है सारी बगिया, झूम रही है नन्ही कलियाँ।
झूम रहे हैं पुष्प रंगीले, महक रहीं गांवों की गलियाँ।।३।।

झूम रही है तितली सुंदर, झूमें गुन-गुन करते भ्रमर।
झूम रहे हैं खेत, बाग, वन, सुन ऊँचे कोयल के मधु-स्वर।।४।।

पवन सुहानी झूम रही अब, झुमा रही है अपने संग सब।
आओ हम भी झूमें, गाएं, मना सभी बासन्ती उत्सव।।5।।
2 घंटे पहले
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Shivam Awasthi

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