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झूमें बांसती उत्सव में ।

                
                                                         
                            धरती पर छाई हरियाली, झूम रही है डाली-डाली।
                                                                 
                            
झूम रही है पीली सरसों, झूम रहे गेहूं की बाली।।१।।

झूम रहे हैं चंचल खग दल, उड़ते नभ में ऊँचे प्रतिपल।
चहचहाते आपस में खुश हो, गुंजा रहे बोली से नभ-थल।।२।।

झूम रही है सारी बगिया, झूम रही है नन्ही कलियाँ।
झूम रहे हैं पुष्प रंगीले, महक रहीं गांवों की गलियाँ।।३।।

झूम रही है तितली सुंदर, झूमें गुन-गुन करते भ्रमर।
झूम रहे हैं खेत, बाग, वन, सुन ऊँचे कोयल के मधु-स्वर।।४।।

पवन सुहानी झूम रही अब, झुमा रही है अपने संग सब।
आओ हम भी झूमें, गाएं, मना सभी बासन्ती उत्सव।।5।।
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एक घंटा पहले

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