जागो रे, जागो रे,
उठ खड़ा हो चुका है नया सवेरा।
कल के पीछे भागने वालों,
आज की चिंता न करने वालों,
अपने मन की करने वालों,
दूसरों की बात न सुनने वालों,
किताबी ज्ञान को ही अपनाने वालों,
बाहरी ज्ञान को छोड़ने वालों,
ज़िंदगी में हारकर, विवश होकर,
खुद को दोष देने वालों,
कुछ कर गुज़रने की क्षमता रखकर,
हार के डर से रोने वालों—
जागो रे, जागो,
उठ खड़ा हो चुका है नया सवेरा।
अत्याचार सदा सहने वालों को,
गलत के खिलाफ आवाज़ न उठाने वालों,
मजबूरी के तले जीने वालों,
किसी समस्या में पड़ जाने पर
कोई दूसरा आकर बचाएगा,
ऐसा सोचने वालों,
कुछ कर गुज़रने की क्षमता रखकर,
हार के डर से रोने वालों—
जागो रे, जागो,
उठ खड़ा हो चुका है नया सवेरा।
कुछ दूर जाकर पछताने वालों,
सफलता की राह पर निकल जाने पर भीअसफलता के डर से
बीच में छोड़ने वालों,
सफलता प्राप्त नहीं कर सकते,
ऐसा सोचकर प्रारंभ ही न करने वालों,
कुछ कर गुज़रने की क्षमता रखकर,
हार के डर से रोने वालों—
जागो रे, जागो,
उठ खड़ा हो चुका है नया सवेरा।
विकसित भारत का स्वप्न देखने वालों,
पर खुद विकसित होने का प्रयास न करने वालों,
सब विकसित होंगे तो
भारत खुद-ब-खुद विकसित होगा।
बीच में ही छोड़कर
कभी मत जाना तुम सब,
कुछ कर गुज़रने की क्षमता रखकर,
हार के डर से रोने वालों—
जागो रे, जागो,
उठ खड़ा हो चुका है नया सवेरा।