मुझे खुद से शिकायत है , कि मैं कुछ कर नहीं सकता |
बिना तेरे , मैं इस जहां में रह नहीं सकता ||
बड़ी मुस्किल से पाया है , तुझे मैंने |
मैं चाह-कर के भी , अब तुझको भुला नहीं सकता ||
देखकर दीदार तेरा, मुझको अब नींद आती है|
तू चाहे जहाँ रहे जहां में , फिक्र तेरी सताती है ||
दूरियां चाहे बढे़ जितनी, मैं फिर भी पास तेरे हूं|
तू मुड़-कर देखना परछाईं में , मैं तेरे पास हूं ||
मुझे खुद से शिकायत है , कि मैं कुछ कर नहीं सकता |
बिना तेरे , मैं इस जहां में रह नहीं सकता ||
बड़ी आशा मुझे तुझसे , तू मेरे पास ही रहना |
खिले जो फूल , उनको तू खिलाये ही रखना ||
बड़ी तकलीफ़ होती है , जब तू दूर है होती |
बिस्तर चाँद पर हो अपना, पर आँखों में नींद ना होती ||
मुझे खुद से शिकायत है , कि मैं कुछ कर नहीं सकता |
बिना तेरे , मैं इस जहां में रह नहीं सकता ||
कुलदीप
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