बेरोज़गारी में,
दो वक्त की रोटी भी,
सकून से नहीं मिलती।
नौकरी आसानी से,
मिलती नहीं है।
व्यापार- धंधा करो,
बड़े- बड़े लफड़े झेलो,
बिजली का बिल,
नौकरों का वेतन,
उधारी का धंधा,
करने के बाद भी,
पैसे बचाना कठिन है ,
जीएसटी, आयकर,
विभाग को रिश्वत ना दो तो, अनावश्यक छापेमारी झेलो,
सब कुछ डिजिटल,
होने के बाद भी ,
वकील की फीस,
चौदह घंटे की मेहनत के बाद,
कुछ बचा पाओ ,
वह आपकी किस्मत है,
योग्यता है -चालाकियां हैं।
अभी आनलाइन व्यापार से,
प्रतिस्पर्धा करना बाकी है।
अब बताओ रोजगार,
कितनी कठिनाई से,
करना पड़ता है।
तभी नौजवान ,
नौकरी की तरफ,
भागते नजर आते हैं।
भले ही दिन में व्यस्तता हो
किन्तु रात को सोते हुए,
नजर आते हैं।
-कुलदीप शुक्ला