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अपराध को दूर भगाएं

Kuldeep Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितने महल हवेली,
        
                                                    
                            
वीरान पड़े हैं देश में,
उनका कोई वैधानिक,
दावेदार दूर तक नहीं है।
कितने मंत्री सांसद विधायक को,
लोग भूलने लगे हैं,
रईशों के आंकड़े बदलने लगे हैं।
फिर आओ ना,
कमजोर का सहारा बनें,
भूले भटके को गले लगाएं,
गरीब कन्याओं की शादी कराएं,
मानवता की मिसाल बनें,
आदमी आदमी के काम आए,
क्या रक्खा है घूसखोरी में,
लोगों की जमीन कब्जाने में,
साइबर अपराध करने में।
जब सब यहीं धरा रह जाएगा,
आओ इन्सानियत अपनाएं,
अपराध को दूर भगाएं।
अपराध को दूर भगाएं।।
-कुलदीप शुक्ला
2 घंटे पहले
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