विज्ञापन

फिर क्यों अहंकार में इठलाऊं मैं

Kuldeep Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब मृत्यु नहीं निश्चित मेरी,
        
                                                    
                            
क्यों आगे की प्लानिंग बनाऊं मैं,
ट्रेन दुर्घटना में मर जाऊं ,
प्लैन क्रेश में मर जाऊं ,
सड़क दुघर्टना में मर जाऊं,
हार्ट अटैक से मर जाऊं।
जब मौत नहीं निश्चित मेरी,
फिर क्यों अहंकार में इठलाऊं मैं,
अपराध से पैसे कमाऊं मैं।
जब सब अनिश्चित है जीवन में,
समाज में अच्छे कार्य करुं,
जीवन को आदर्श बनाऊं मैं।
जीवन को आदर्श बनाऊं मैं।।
-कुलदीप शुक्ला
10 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nivedan Kumar

12 कविताएं

View Profile

Yunush khan

8124 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10438 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12711 कविताएं

View Profile

suckhi singh

11 कविताएं

View Profile