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अदाकार कहलो

Kuldeep Maurya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दुनिया के इस रंगमंच का एक छोटा सा किरदार कहलो।
        
                                                    
                            
पहचान अगर पूछो तो, अदाकार कहलो।

तालियों की चाह नहीं, न ही रोशनी का शोर,
पर्दे के पीछे रहकर भी निभा लूँ हर एक दौर।
कभी खामोशी में बोलूँ, कभी शब्दों से हार जाऊँ,
जो मिला है इस पल में, उसी को संसार कहलो।
पहचान अगर पूछो तो, अदाकार कहलो।

नायक भी नहीं हूँ मैं, न खलनायक का नाम,
चलती कथा में बस चलता हुआ एक विराम।
जो देखा, जो समझा, वही सच मान लिया,
मेरी सादगी को मेरी पहचान कहलो।
पहचान अगर पूछो तो, अदाकार कहलो।

मैंने खुद को अक्सर अपनी ही नज़रों से गिरते देखा है,
और फिर उसी टूटन से खुद को धीरे धीरे उठते देखा है।
जो बिखर कर भी जुड़ गया, उसे मेरा साहस कहलो।
पहचान अगर पूछो तो, अदाकार कहलो।

कुछ सपने अधूरे रह गए, कुछ ख्वाहिशें थक कर सो गईं,
पर जीवन की ज़िद देखो, वो हर सुबह फिर से हो गई।
जो चल पड़ा बिना शिकायत, उसे मेरी आदत कहलो।
पहचान अगर पूछो तो, अदाकार कहलो।

मैं भीड़ में हँसता रहा, ताकि कोई पढ़ न ले आँखें,
कई दर्द यूँ ही रह गए बिन आवाज़ के, बिन बातों के।
जो सह लिया मुस्कान ओढ़े, उसे मेरी ताक़त कहलो।
पहचान अगर पूछो तो, अदाकार कहलो।

अगर कभी लगे कि ये सब बहुत साधारण है,
तो याद रखना इसी सादगी में मेरा अस्तित्व है।
बिना नाम, बिना तमगे, बस निभाई गई भूमिका है।
और जब सब खत्म हो जाए, न मंच रहे, न पर्दा,
उस एक ईमानदार निभाव को मेरी पूरी ज़िंदगी कहलो।
पहचान अगर पूछो तो, अदाकार कहलो।

दुनिया के इस रंगमंच का एक छोटा सा किरदार कहलो।
पहचान अगर पूछो तो, अदाकार कहलो।
- कुलदीप कुमार मौर्य 
8 महीने पहले
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