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एक गजल

Kulbhushan Choudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलो आज फूलों से आशकी का हुनर सीख लो,
        
                                                    
                            
मुरझा कर भी माशूक के लिए महक छोड़ना सीख लो,

आशिकी देने का कुछ खोने का ही नाम है,
कांटों से इश्क कैसे करें गुलाब से सीख लो,

धूप हो छांव हो आंधी या बरसती बरसात हो,
साथ कैसे निभाया जाता है फूलों से सीख लो,

मंदिर में मस्जिद में कब्र पर या मजार पर,
बीना भेदभाव चढ़ाए जाना गुलों से सीख लो,

गैंदे गुलाब चंपा चमेली और मोगरा महकाते हैं बाद-ए-सबा को,
एकता क्या होती है भूषण इन फूलों से सीख लो...
 
2 वर्ष पहले
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