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धरती कहे पुकार के

Kulbhushan Choudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धरती कहे पुकार के मुझे संभालो प्यार से,
        
                                                    
                            
मैं भी तो इक मां हूं तुम्हारी पालती हूं प्यार से,

काट कर पेड़ों को तुमने जंगल छोटे कर दिए,
कच्चे पक्के सभी तरह के पालती थी प्यार से,

पेड़ों की शाखें कांप रही धूप से हो रहे निढाल,
नदियां नाले सूख रहे बरसेंगे बादल बहार से,

धरती कहे पुकार के न करो मेरा चीर हरण,
पेड़ पानी की रूठ जाएंगे मुरझा जाओगे प्यास से,

हरे जंगल कट कट कर पत्थर के जंगल बन रहेपीपी
पिघल रहे पठार बर्फ के दिल चीखे हाहाकार से

धरती माता कर रही बच्चों से पुरजोर पुकार,
उपकार करो मुझ पर दो पेड़ लगा कर प्यार से। 
एक वर्ष पहले
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Updesh Kumar

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