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दामन बेदाग रखनें की चाह है

kshama Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दामन बेदाग रखनें की चाह है
        
                                                    
                            
कल तक जिन रास्तों को पाने की चाह थी
आज उन्हीं से बहुत दूर जाने की चाह है
आसान रास्ता माफिक नहीं है ऐ जिन्दगी
पथरीला मंजूर है पर दामन बेदाग रखनें की चाह है

 
2 दिन पहले
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