दामन बेदाग रखनें की चाह है
कल तक जिन रास्तों को पाने की चाह थी
आज उन्हीं से बहुत दूर जाने की चाह है
आसान रास्ता माफिक नहीं है ऐ जिन्दगी
पथरीला मंजूर है पर दामन बेदाग रखनें की चाह है
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