देख तुम्हारी दीन दशा ,
ऐ बापू कौन है , जो रोए ।
पग -चिन्हों पर तेरे चल कर ,
चिन्ह तेरे सब धोए ।१।
उपहास तेरा, उपदेश तेरा ,
वो सत्य अहिंसा ध्येय तेरा ।
विस्मृत होते उन लम्हों को,
कैसे कैसे रहूं सजोए ।२।
भारत मां की जंजीरों को ,
काट दिया आजादी हमको ।
याद करो मां के आंगन में ,
खैंच लकीरें तुम ही तो थे तब रोए।३।
टांग तेरी तस्बीर द्वार में ,
बन मराल घूमें दयार मेंं ।
छल प्रपंच और झूठ अस्त्र से ,
बको ध्यान रत रहूं शिकार मेंं खोए।४।
सत्य अहिंसा ब्रह्मचर्य सब ,
शब्द सभी अनमनें पड़ें हैं ।
हिंसा झूठ और अनाचार ,
उच्चीकृत हो कर नज़र चुभोए।५।
हिंसा नंगा नाच रही है ,
मृषा सत्य को जांच रही है ।
दोहरे होते मानदंड नें ,
नाव चढ़े फिर नाव डुबोए ।६।
पल-पल में हो रहे घोटाले ,
जांच -जांच में भी घोटाले ।
आकांक्षा की होड़ ए कैसी ,
बिन बूझे ही कांटे वोए ।७।
न दीन यहां , न नाथ यहां ,
स्वारथ के सब साथ यहां ।
स्वारथ में सब लगे सहोदर ,
डान माफिया कोई होए ।८।
पाती लिख दी तेरे नाम ,
आखिरी शब्द तेरे' हे राम'।
भूल चली अब नवल पीढ़ियां ,
नव गांधी के रंग डुबोए ।९।
कृष्ण मुरारी पाण्डेय (सृजन)।
रिसिया (बहराइच) ।
मो०नं०:- ८८८७६०१७२३.
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