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पाती बापू के नाम....

krishna murari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देख तुम्हारी दीन दशा ,
        
                                                    
                            
ऐ बापू कौन है , जो रोए ।
पग -चिन्हों पर तेरे चल कर ,
चिन्ह तेरे सब धोए ।१।

उपहास तेरा, उपदेश तेरा ,
वो सत्य अहिंसा ध्येय तेरा ।
विस्मृत होते उन लम्हों को,
कैसे कैसे रहूं सजोए ।२।

भारत मां की जंजीरों को ,
काट दिया आजादी हमको ।
याद करो मां के आंगन में ,
खैंच लकीरें तुम ही तो थे तब रोए।३।

टांग तेरी तस्बीर द्वार में ,
बन मराल घूमें दयार मेंं ।
छल प्रपंच और झूठ अस्त्र से ,
बको ध्यान रत रहूं शिकार मेंं खोए।४।

सत्य अहिंसा ब्रह्मचर्य सब ,
शब्द सभी अनमनें पड़ें हैं ।
हिंसा झूठ और अनाचार ,
उच्चीकृत हो कर नज़र चुभोए।५।

हिंसा नंगा नाच रही है ,
मृषा सत्य को जांच रही है ।
दोहरे होते मानदंड नें ,
नाव चढ़े फिर नाव डुबोए ।६।

पल-पल में हो रहे घोटाले ,
जांच -जांच में भी घोटाले ।
आकांक्षा की होड़ ए कैसी ,
बिन बूझे ही कांटे वोए ।७।

न दीन यहां , न नाथ यहां ,
स्वारथ के सब साथ यहां ।
स्वारथ में सब लगे सहोदर ,
डान माफिया कोई होए ।८।

पाती लिख दी तेरे नाम ,
आखिरी शब्द तेरे' हे राम'।
भूल चली अब नवल पीढ़ियां ,
नव गांधी के रंग डुबोए ।९।

कृष्ण मुरारी पाण्डेय (सृजन)।
रिसिया (बहराइच) ।
मो०नं०:- ८८८७६०१७२३.
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करे।
5 वर्ष पहले
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