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हिंदी शीर्षक (एहसास)

kishan kharadi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई अहसास नया नया सा है
        
                                                    
                            
ख़्वाबों का आसमां खुला खुला सा है
कोई सुकून कोई क़रार मिला है
जाने क्यों दिल खिला-खिला सा है
यूं लगा इंतजार खत्म हुआ आज
बुझा बुझा सा था जो दीप रोशनी से अब
समा धुला धुला सा है
मुरझा सा गया था बहारों में भी कोई एक फूल जो खिला-खिला सा है
जो कुछ खोया वह पाया पाया सा है
-किशन खराड़ी 
एक महीने पहले
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