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आईना

Kirti Tomar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर आईना जो तेरी तस्वीर दिखाता है-2
        
                                                    
                            
हर जगह बस वो शख्स ही तस्वीर बनाता है,
कहो तो, दिल की धड़कनों के अफ़साने भी उसके नाम कर दूँ,
बस फ़र्क ये की, वो शख्स रोज़ रुलाता बहुत है।

मोहब्बत के इस जाम को, कहो तो मैं इसे पूरा पी जाऊं -2
अपनी ये तन्हाई से भरी ज़िन्दगी को भी उसके नाम कर जाऊं,
यहां ये आईना है मेरी इबादात का शौकीन
कहो तो मैं ता उम्र ही उसके नाम का जाम पी जाऊं।

मयखाना है ये, कहो तो इश्क़ का जाम उतार कर इसे पी जाऊं,
बचे हुए कसर भी बता, मैं उसको उसमे मिला कर पी जाऊं
बतौर-ए-इश्क़ का भी सही इस्तेमाल किया तूने 
कहे तो ,आयने के सामने रख इसे, तेरे ही इश्क़ में मुसाफिर हो जाऊं।

वक़्त बहुत किआ था इस आईने ने तुझे देखने के लिए,
तू ही बता, क्या में इस तस्वीर से खुद का ही ग़ुलाम हो जाऊं।
तराशे बहुत थे इस आईने ने देखने को तस्वीर की झलक,
ये सवार दी तेरी ही तस्वीर इसने, कहो तो में ही समा जाऊं।

आईना हूं में, कहो तो में ही तुम्हारी बुनियाद बन जाऊं,
आओ, सवार दूं, यूँ तुमको इस तरह से की, में खुद ही तुमपे फ़ना हो जाऊं,
रख तस्वीर बनाये तुमको, मैं अपने ही अंदर समा जाऊं,
शख्स है इस दुनिया का, कहो तो बाहर आ में तुम्हारा बन जाऊं।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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