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नेपाल त्रासदी

Kiran Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            त्रासदी में शहर का शहर डुब गया
        
                                                    
                            
व्यवस्थित कारवां पल में बह गया

जिन्दगी का कोई भरोसा ही नहीं
देखकर ऐसा मंजर हृदय कह गया

आजमाती प्रकृति सब्र को तोड़कर
देखते- देखते न कोई रह गया

बावले हो गए देख भयावह घड़ी
बाढ़ जिगर चीरकर सितम कर गया

जिन्दगी ज़र ज़मी कौन संचित करे
ग्लेशियर गाँव का गाँव ही लील गया

जलप्लावन कीचड़ में धरा आज है
अपना बिछड़ा हुआ न कोई मिल गया

द्रवित देखकर यह हृदय है किरण
प्रकृति क्रोध प्रमाण प्रत्यक्ष दिख गया।
 
एक महीने पहले
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