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मिलावट से सावधान-

Kiran Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अचंभित ना हो जान के कि जान की बाजी लगा रहे
        
                                                    
                            
ईटा पत्थर खाकर भी सब जीवन अपना बचा रहे

मिलावट की हुई बेशर्मी अब हवा पानी राशन तक
हर सामान है जहरीला लोग खाकर आयु घटा रहे

मजबूरी है लोगों की जो खाने पर मजबूर हुए
अन्न और पानी हवा तलक ये जहरीली बना रहे

ऐसी ललक लगी पैसे की ईमान न कोई धरम है
ये भी दुश्मन देश में हैं खाने में जहर मिला रहे

घर-घर में लोगों को बीमारी ने ऐसे घेर लिया
चक्व्यूह में सभी फंसे हैं सच-सच सब कुछ बता रहे

अब तो ऊपर वाला जाने आगे अभी भी क्या होगा
तरक्की की होड़ों में मानवता बेच के खा रहे

नहीं हृदय में दया मर्म है मिलावट इन खोरों के
बीच बाजार और ठेलों में विष की हाटें लगा रहे

बातें अपनी रखूँ कहाँ पर जहाँ हमें इंसाफ मिले
रसोई में सबके ही खाना शुद्ध और हवा रहे

कहे किरण मन बहुत द्रवित है उल्टे-पुल्टे लोगों से
कैसे निवाला खा लेते जिन हाथों जहर पिला रहे।
 
एक महीने पहले
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