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चांद से रिश्ता

khushi Bunkar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम भी चांद से क्या क्या रिश्ते बना बैठे है
        
                                                    
                            
छोटे थे बचपन में हमारा मामा था चांद
बड़े हुए महबूब चाहिए चांद जैसी
शादी हुई तो मां को बहू चाहिए चांद जैसी
हुई पैदा किलकारी घर में बेटी चाहिए चांद जैसी
जिम्मेदारी आई कंधों पर सीरत चाहिए चांद जैसी
तमाचा मारा वक्त ने तो बुढ़ापा चाहिए चांद जैसा
आई मौत सामने तो "खुशी" चाहिए चांद जैसी
3 वर्ष पहले
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