गर तुमने भी फासले बनालिये तो
करीब कौन रहेगा..
तुम पास ना हुए हमारे तो
हमें खुशनसीब कौन कहेगा...
और ये धुप, ये किरणे तो
अक्सर चुभ जया करती है
लोगों को..
जो घटाए और बारिश ना होंगी
तो फिजाओं का रकीब कौन रहेगा..