अगर तुझे लगता है मैं तेरे हुस्न पर फ़िदा हूँ, तो ग़लत लगता है।
हाँ, तू है हुस्नपरी पर मुझे तो तेरा छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाना अच्छा लगता है, तेरी तारीफ़ पर तेरा मुस्कुराना,
वो अच्छा लगता है।
कि
तेरे बालों में मोगरे का फूल लगाऊँ,
तेरी कलाइयों में चूड़ियाँ पहनाऊँ,
तेरी पसंद के झुमके पहनाऊँ,
तुझे हद से ज़्यादा सँवारूँ,
तेरे पाँव में पायल पहनाऊँ,
तू कहे तो पैरों में झुक जाऊँ।
तू कहे रही होगी यह सब क्यों?
तेरी आँखों का नूर,
तेरी बातों का सुर,
तेरी वो मीठी-मीठी बातें,
तेरा मुँह बनाना,
तेरा दाँतों में उँगली दबाना
अच्छा लगता है!
हाँ, तेरा हुस्न लाजवाब,
तेरी अदा लाजवाब,
पर हमारा दिल तो तुम्हारी इन दो आँखों
और तुम्हारे इस लहजे में आ गया है।
मन तो करता है तुम्हें रोज़ सँवारूँ,
पर कमबख्त हम आपके हैं कौन!