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नारी तुम तो शक्ति हो...

Kavi Yogendra

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                            नारी तुम तो शक्ति हो....
        
                                                    
                            
सरल हृदय और पावन मन की
एक तुम्ही अनुरक्ति हो
कवि तुमको क्या उपमा देगा
नारी तुम तो शक्ति हो।।1।।
तुम दुर्गा अवतार लिए और
महिषासुर संहार किये
खप्पर वाली काली बनके
रक्तबीज का खून पिये।।
अनन्त काल से इस वसुधा पर
भक्तों की तुम भक्ति हो
कवि तुमको क्या उपमा देगा
नारी तुम तो शक्ति हो।।2।।
ममता की तुम मूरत बन के
नेह लूटती हो जग में
करूणा का तुम सागर बनके
आस जगाती हो सब में
तुमसे यह सृष्टि बनती है
तुम जग की आसक्ति हो
कवि तुमको क्या उपमा देगा
नारी तुम तो शक्ति हो।।3।।
जल थल नभ में तुम ही तुम हो
तुम हो ज्ञानी विज्ञानी
कला संस्कृति तुझ में सिमटी
तुम हो धरती पे ध्यानी
सदा कष्ट सहती हो फिर भी
धैर्य हृदय में रखती हो
कवि तुमको क्या उपमा देगा
नारी तुम तो शक्ति हो।।4।।
चराग़ सलेमपुरी


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