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नज़र से नज़र

Kavi Shakti

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिलाकर नज़र से नज़र
        
                                                    
                            
मुझे भी अपना बना लेना
ज़िंदगी बहुत ही छोटी सी है
थोड़ा सा साथ तुम भी निभा देना
जो छोड़ दूं मैं तेरा साथ
कभी जिंदगी के सफ़र में
तो मेरी कब्र पर गुलाब लगा देना
आ जाए जो याद इस नाचीज़ की कभी तुझको
तो तोड़कर उन गुलाब के फूलों को
अपने गजरेे में सजा लेना
अपने गजरे में सजा लेना

कवि शक्ति सिंह चौहान
चैनपुरिया (चितौड़गढ़) राज.

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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