विज्ञापन

कविता

Kavi Rajesh

Mere Alfaz
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            साल सत्रह
        
                                                    
                            

बीत गया साल सत्रह
लाया था जो खतरा
नोटबन्दी कालाधन
मुद्दे लेकर था पसरा
लम्बी लम्बी कतारें
नए नोट संग सेल्फी
सारी बीती ये यादें
कचरे के ढेर से ये
पुराने नोट बिखरे
स्वच्छता अभियान
नेता अभिनेता सभी
हाथों में झाड़ू थाम
नित कदम बढ़ाते
सत्रह में स्वच्छता
देखने लायक हुई
हर क्षेत्र में सफाई
भ्र्ष्टाचारी जेल में
ढोंगी बाबा जेल में
देखते ही देखते
क्लीन इंडिया है
ग्रीन इंडिया है
समान कर है
एक सा देश में
हर गांव में रोशनी
हर गाँव में पेयजल
हर गाँव स्वच्छ
साफ सुथरी ढाणी
नेट से जुड़े गाँव
डिजिटल हुआ देश
अपना रुपया जमा
अपने खाते में आया
बिचौलियों का अंत
सारा रुपया सुरक्षित
ऑनलाइन पेमेंट
कैशलेस पेमेंट
घर बैठे मिली सुविधा
समय बचा धन बचा
विवादित फिल्में
पद्मावती का हंगामा
करणी सेना का विरोध
लीला भंसाली हुए चर्चित
इतिहास से छेड़छाड़
लगे कई आरोप
आज हर मुखड़े पर
एक ही नाम पद्मावती
सेना ने किए कई
आतंकवादी साफ
पाक न आया बाज
सारा देश एक रंग में
दिखता केवल भगवा

- कवि राजेश पुरोहित
  भवानीमंडी

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

419 कविताएं

View Profile