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हृदय की व्यथा को कहाँ तक छुपाना

Anonymous User

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                            नयन नीर झरते दिशाएँ विकल हैं
        
                                                    
                            
हृदय की व्यथा को कहाँ तक छुपाना
अधूरी प्रतीक्षा अधूरे हैं सपने
कठिन श्वास का भार कैसे उठाना
नयन नीर झरते दिशाएँ विकल हैं
हृदय की व्यथा को कहाँ तक छुपाना

घनेरे तिमिर ने दिशाएँ निगल लीं
नहीं दूर तक ज्योति का है किनारा
भँवर में फँसी है प्रणय की ये नैया
नहीं दिख रहा है कोई अब सहारा
गहन सोच में शून्य को ताकता मन
कठिन हो गया है भँवर पार जाना
नयन नीर झरते दिशाएँ विकल हैं
हृदय की व्यथा को कहाँ तक छुपाना

तुम्हारी छवि को बसा कर नयन में
सजाए थे मैंने सुनहरे से सपने
मगर वक़्त की निष्ठुर आँधियों में
पराए हुए जो कभी थे वो अपने
बिखरते हुए स्वप्न के इस महल में
अकेले खड़े अब किसे क्या बताना
नयन नीर झरते दिशाएँ विकल हैं
हृदय की व्यथा को कहाँ तक छुपाना

रुलाने लगी हैं बसंती हवाएँ
घटा सावनों की अगन दे रही है
तुम्हारे बिना सूनी मेरी निगाहें
निरंतर विरह की चुभन सह रही हैं
सुलगती हुई इस विरह वेदना में
कहो किस तरह से स्वयं को बचाना
नयन नीर झरते दिशाएँ विकल हैं
हृदय की व्यथा को कहाँ तक छुपाना

मिटा जा रहा हूँ मैं पल पल यहाँ पर
प्रतीक्षा तुम्हारी मगर कम न होती
झड़ी लग गई है सजल अश्रुओं की
व्यथा की यह बारिश कभी थम न होती
निरंतर बरसते नयन के जलद से
कहो किस तरह से नयन को सुखाना
नयन नीर झरते दिशाएँ विकल हैं
हृदय की व्यथा को कहाँ तक छुपाना
अधूरी प्रतीक्षा अधूरे हैं सपने
कठिन श्वास का भार कैसे उठाना
-भानु शर्मा रंज
 
एक घंटा पहले
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