विज्ञापन

हक़ की आवाज/ दक्ष की मुक्तक श्रृंखला

Kaushal kishor

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हक़ की आवाज दबाने को चालें हर रोज चलेंगे वो।
        
                                                    
                            
कोई भी प्रश्न किया तुमने? उत्तर में कैद करेंगे वो।
डोलते हुए सिंहासन पर कैसे भी क़ाबिज़ रहने को;
हर एक सही आंदोलन को भी देशद्रोह कह देंगे वो।
-कौशल किशोर मौर्य ‘दक्ष’
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pradeep Kairana

2 कविताएं

View Profile

Kunwar Sarvendra

167 कविताएं

View Profile