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धिक्कार/दक्ष की मुक्तक श्रृंखला

Kaushal kishor

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            महंगाई के कारणवश जो द्रव्य लगा न केशों पर।
        
                                                    
                            
भक्तगणों ने किया न अर्पित जितना पूज्य गणेशों पर।
अगणित समस्याएं देहरी पर औ' जनप्रतिनिधि राय बना;
बेशुमार.. धिक्कार...!! ‘दक्ष’ उन दीपों औ' आदेशों पर।
-कौशल किशोर मौर्य ‘दक्ष’
3 घंटे पहले
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