विज्ञापन

दक्ष का मुक्तक

Kaushal kishor

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ‘क्यों’ औ' ‘कैसे’ जिनके प्रश्नोत्तर नहीं हैं।
        
                                                    
                            
सत्य, नूतन सोच के अंकुर नहीं हैं।
भाट–चारण, कूपमेंढक, रूढ़िवादी;
‘दक्ष’ ऐसे लोग विकसित नर नहीं हैं।
- कौशल किशोर मौर्य ‘दक्ष’
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all