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दक्ष की मुक्तक श्रृंखला / प्रेम – पावक

Kaushal kishor

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज भी जल रही प्रेम – पावक हृदय।
        
                                                    
                            
न बुझा पाया विप्रलंभ – जल कर विलय।
‘दक्ष’ अमरत्व की राह पर यह अनल,
मात्र संयोग – समिधा से संभव है क्षय।
-कौशल किशोर मौर्य ‘दक्ष’
एक दिन पहले
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