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दक्ष की मुक्तक श्रृंखला /क्रांति

Kaushal kishor

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मशालें क्रांति की अंतस लिए अविचल बढ़ें पथ पर।
        
                                                    
                            
फ़रेबी अफसरों, नेताओं प्रति आक्रोश है हर सर।
रहोगे ताज—ए—मसरूक पर तुम कब तलक काबिज?
‘दक्ष’ पदच्युत होने पर सलाखें ही तुम्हारा घर।
- कौशल किशोर मौर्य ‘दक्ष’
4 घंटे पहले
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