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राजहठ

कौशलेंद्र

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आदेश है
        
                                                    
                            
कि लोग सोचें
केवल तुम्हारी तरह
रहें
केवल तुम्हारी तरह
जियें भी
तो केवल तुम्हारी तरह
क्योंकि तुम बनाना चाहते हो
विश्वगुरु
पता नहीं
स्वयं को
या पूरे देश को!
किंतु मैं
नहीं बनना चाहता विश्वगुरु
बनकर
तुम्हारा वैचारिक दास।
संभव ही नहीं है
सच हो पाना
तुम्हारा हठ।
तुम इसे ही कहते हो
लोकतंत्र
मैं इसे ही कहता हूँ
आॅब्सेसिव कंपल्सिव बिहैवियर
जिसके लिए जाना होगा तुम्हें
किसी मनोरोग विशेषज्ञ के पास
हाँ!
तुम रुग्ण हो
जान चुका है पूरा देश।
एक दिन पहले
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Jeewan Singh

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