विज्ञापन

चाण्डाल योग

KAMLESH VERMA

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चुप्पियां !
        
                                                    
                            
तोड़ी जा सकती थी,
हुंकार
भरी जा सकती थी ,
बढ़े हुए नाखूनों से
खरोंची जा सकती थी संवेदनाएं,
और तुम हो कि
परित्यक्त शैलों की तरह
पड़े रहे बेखबर ।

युद्ध और शांति के बीच
एक दुनिया और भी है
जो घुटती रही है बार-बार
और खोजती रही है
अपने अस्तित्व की वजह हमेशा से....

युद्ध थोपे जाते हैं
अहंकार के कारण
मानवीय कुचली जाति है
संकुचित मानसिकता के कारण

इस बीच बैचेनी है कि
क्या अपने हक की लड़ाई
इतनी ख़तरनाक है ?
या सच यह है देश की छाती में बैठा है
चाण्डाल योग ?
- कमलेश वर्मा
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile