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उठो! उठो!

Kamlesh Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उठो कि अभी तो शुरुआत है,उठो कि बाकी पूरी रात है,
        
                                                    
                            
उठो कि सपनों की सौगात है,उठो कि मंज़िल तुम्हारे साथ है!

अभी तुम्हारे भीतर छिपी,प्रतिभाओं की सौगात है,
हर बंद द्वार के पीछे,नई मंज़िल की शुरुआत है।
अपने मन का दीप जलाओ,अपनी शक्ति को पहचानो,
जो अब तक तुमने किया नहीं,उसको करके दिखलाओ!

उठो! कि अब उठना बाकी है,उठो! कि अभी चढ़ना बाकी है,
मंज़िल चाहे जितनी दूर हो,इतिहास तुम्हें ही लिखना बाकी है!

इतना उठो कि आसमान,अपनी सीमा पर सोचने लगे,
तुम्हारे हौसलों के आगे,हर मुश्किल भी झुकने लगे।
तूफ़ानों से आँख मिलाओ,बिजलियों से मत घबराओ,
राह कठिन हो, रात घनी हो,फिर भी कदम बढ़ाते जाओ!

दुनिया में कुछ ताली देंगे,कुछ गिरने की राह तकेंगे,
कुछ तुम्हारी जीत पर हँसेंगे,कुछ तुम्हारी हार पर हँसेंगे।
तुम दुनिया की मत सुनना,अपने दिल की आवाज़ चुनना,
लोग बदलते रहेंगे लेकिन,अपने संकल्प पर अडिग रहना!

उठो! कि अपने विश्वास से उठो,उठो! अपने प्रयास से उठो,
दुनिया क्या सोचेगी, छोड़ो,अपने उद्देश्य के प्रकाश से उठो!

लेकिन इतना याद रखना,अकेले ऊँचा मत उठना,
माँ-बाप के अधूरे सपनों को,अपने कंधों पर लेकर चलना।
गुरुओं के विश्वास को रखना,अपनों की हर आस को रखना,
जिनकी दुआओं ने राह दिखाई,उनका मान सदा ऊँचा रखना!

विद्यार्थी हो, ज्ञान में उठो,विचार और संस्कार में उठो,
केवल अंकों से क्या होगा,अपने आचरण के आधार में उठो।
नौकरी में हो, काम से उठो,ईमान और सम्मान से उठो,
केवल पद और वेतन क्या है,अपनी ज़िम्मेदारी के मान से उठो।

व्यवसाय करो, उसूलों से उठो,वादों और वसूलों से उठो,
केवल मुनाफ़ा लक्ष्य न हो,औरों के सपनों के फूलों से उठो।
ऐसे उठो कि तुम्हारी जीत,किसी का सपना तोड़ न दे,
तुम्हारी ऊँचाई का अहंकार,किसी का सिर झुका न दे।

ख़ुद भी आगे बढ़ते जाना,औरों को भी राह दिखाना,
सच्ची जीत उसी की है जो,गिरते को भी उठा ले जाना!
उठो! मगर किसी को गिराकर नहीं,उठो! किसी का हक़ मारकर नहीं,
ऐसी ऊँचाई हासिल करना,जहाँ पहुँचो इंसानियत हारकर नहीं!

अपने डर की दीवारों से उठो,निराशा के अँधियारों से उठो,
आलस, बहाने, कल पर छोड़ना,इन सबके पहरेदारों से उठो।
गिर जाओ तो फिर उठ जाना,हार मिले तो लड़ते जाना,
भूल करो तो उसे मानना,सीख लेकर आगे बढ़ जाना।

हर ठोकर एक सबक़ बनेगी,हर कोशिश एक चमक बनेगी,
मेहनत की मिट्टी में बोई,उम्मीद कल की फ़सल बनेगी।
सफलता केवल भाग्य नहीं है,कोई पल भर का राग नहीं है,
इसके पीछे वर्षों की तपस्या,संघर्षों का इतिहास सही है।

आज एक कदम, कल दो कदम,बढ़ते जाना हरदम-हरदम,
रास्ते चाहे लंबे हों,कम मत होने देना दम।
मंज़िल एक दिन में नहीं मिलती,हर कोशिश बेकार नहीं जाती,
जो सच्चे मन से चलते हैं,उनकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाती।
उठो! कि मेहनत पहचान बने,उठो! कि कर्म ही प्रमाण बने,
तुम्हारा काम तुम्हारी आवाज़,तुम्हारा चरित्र तुम्हारी शान बने!
इतना उठो कि नाम तुम्हारा,अपना परिचय ख़ुद बन जाए,
तुम्हारे कर्मों की ख़ुशबू से,हर कोना महकता जाए।

तुम्हारी जीत तुम्हारी न रहे,किसी और की उम्मीद बने,
जो हार के बैठा है राहों में,उसके उठने की वजह बने। तुम्हारे पदचिह्नों पर चलकर,नई पीढ़ियाँ राह बनाएँ,
तुम्हारे संघर्षों की गाथा,नको लड़ना सिखलाएँ।

और जब कोई पूछे तुमसे,इतनी ऊँचाई कैसे पाई?
कैसे हर मुश्किल को जीता,कैसे मंज़िल पास आई? मुस्कुराकर इतना कहना,कोई जादू नहीं था करना,
मेहनत पर विश्वास किया था,गिरकर फिर से खड़ा हुआ था।

न कोई शॉर्टकट अपनाया,न संघर्षों से जी चुराया,
हर दिन ख़ुद को बेहतर करके,अपना मुक़द्दर ख़ुद बनाया!
ओ विद्यार्थी! ओ नौजवान!ओ मेहनतकश! ओ देश की शान!
अपने भीतर की आग बचाना,सपनों को मत राख बनाना।
वक़्त तुम्हारी परीक्षा लेगा,जग तुम पर हँसता भी रहेगा,
रास्ता थककर रोकना चाहे,पर हौसला आगे बढ़ता रहेगा।
थक जाओ तो पल भर ठहरना,लेकिन राह से मत मुड़ना,
हार मिले तो फिर से लड़ना,उम्मीद का दामन मत छोड़ना।

और शिखर पर जब पहुँच जाओ,अपनी मिट्टी याद रखना,
जिन हाथों ने तुम्हें सँवारा,उन हाथों का मान रखना। क्योंकि ऊँचा उठना बड़ी बात नहीं,ऊँचाई पर इंसान रहना है,
जीत के मद में खोना नहीं,दूसरों के लिए भी जीना है।

जीवन केवल बीत न जाए,कुछ ऐसा काम कर जाना,
भीड़ में गुम होकर नहीं,अपनी पहचान बना जाना। तुम्हारी उड़ान का फ़ैसला,औरों के विचार नहीं करेंगे,
तुम्हारे सपने, कर्म, इरादे,तुम्हारे भविष्य को गढ़ेंगे।

तो उठो! पूरे विश्वास से उठो,अपने अटूट प्रयास से उठो,
जब तक डर से बड़ा साहस न हो,तब तक अपने संकल्प के साथ उठो!
जब तक मेहनत पहचान न बने,जब तक कर्म तुम्हारी शान न बने,
जब तक तुम्हें देखकर किसी के,दिल में नया अरमान न जगे! जब तक कोई हारा हुआ इंसान,तुमसे यह कहने न लगे:
"अगर वो कर सकता है,तो मैं भी कर सकता हूँ!
अगर वो उठ सकता है,तो मैं भी उठ सकता हूँ!"

उठो!
उठो!!
उठते रहो!!!
एक घंटा पहले
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samarth dalela

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