विज्ञापन

मेरिटोक्रेसी

Kamini Mohan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ नहीं हो सकता
        
                                                    
                            
उजाले से अंधेरे में जाकर

देखना है भीतर-बाहर तो
देखो पूरी रोशनी में आकर

पूर्वाग्रह से भरा अंधेरा
चारों ओर युद्ध का डेरा

टूटी धड़कन टुकड़ा-टुकड़ा
बोझिल शब्द से बनता मुखड़ा

कोई उठकर खड़ा नहीं होता
सिर्फ़ मेरिटोक्रेसी पर अड़ा नहीं होता

बहस बाज़ीगर करता घमासान
नाक़ाबिल क़ाबिल के धरते कान।
- कामिनी मोहन
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3565 कविताएं

View Profile