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हौसले की उड़ान

kamal jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हवाएँ चाहे कोशिश कर लें,
        
                                                    
                            
बढ़ते कदम को रोक न पाएंगे।
मन में अटल विश्वास रखकर,
हम बस आगे बढ़ते जाएंगे।

राहों में काँटे आयेंगे बेशक,
मंज़िल चाहे दूर ही सही।
जिसके इरादे हैं पर्वत जैसे,
उसके जैसा कोई सूर नहीं।

आज जो दीवार बन खड़े हैं,
कल वही साथ निभाएँगे।
सफलता की शीर्ष पर,
आकर शीश झुकाएँगे।

हवा दीये को बुझा देती है ,
पर ज्वाला इससे प्रचंड बने।
संघर्षों की हर एक चिंगारी,
जीवन को कुंदन-सा गढ़े।

हर ठोकर एक सीख बन जाए,
हार भी साहस का गीत बने।
जो अपने इरादे पर अडिग रहे,
वही इतिहास एक नवीन रचे।

चलते रहें बिना थके अनवरत,
अब सपनों को सच करना है।
अँधेरे को चीर आगे बढ़ना है,
अपने गंतव्य तक पहुँचना है।
—कमल किशोर झा 
2 महीने पहले
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