बदलते वक्त का दुनिया के, कभी अहसान नहीं लिया,
दूसरों की कमियों से, मैंने खुद का सम्मान नहीं किया।
ताउम्र अपनी सादगी का बस यही सलीका याद रखा,
झूठी बंदगी की खातिर, ज़मीर का नुकसान नहीं किया।
आईने तो बने ही थे अपनी खुद की परख के वास्ते,
किसी की मजबूरी को देखकर, खुद को भगवान नहीं किया।