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किस्मत का आखरी पन्ना

kalu ram

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारी आदतें भी मुकद्दर को थीं,
        
                                                    
                            
हमारे फासले भी मुकद्दर को थे।
हमारे रस्ते भी मुकद्दर को थे,
हमारे हौसले भी मुकद्दर को थे।
हमारा वक्त भी मुकद्दर को था,
और उस वक्त में 'मैं' भी मुकद्दर को था।
हमारी आँखों के आंसू भी मुकद्दर को थे,
हमारी महफ़िल के चिराग भी मुकद्दर को थे।
जो मिलीं वो नाकामियाँ भी मुकद्दर को थीं,
जो खो गईं वो खुशियाँ भी मुकद्दर को थीं।
उस कशमकश में थोड़ा सब्र भी मुकद्दर को था,
मगर काश... थोड़ा और मुकद्दर था।
काश किस्मत की लकीरों में एक पन्ना और होता,
तो जो मुकद्दर को न था, वो भी आज हमारा होता।
5 घंटे पहले
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Ramesh Raj

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