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मैरिटल रेप

kajal yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खाार नहीं करते वो मुझसे इश्क़ करते हैं
        
                                                    
                            
वो मेरी रूह को नहीं, मेरे जिस्म को तकते हैं
वो सिंदूर लाल लगा कर मुझे लहूलुहान करते हैं
हां वो मेरे बदन पर इश्क़ की निशानी देते हैं
मैं उसकी जायदाद हुई इसकी वसीयत ज़ुबानी देते हैं
वो निर्वस्त्र कर मुझे अपनी हवस की लाज बचाते हैं
उसका इश्क़ मेरी सहमति के आड़े आता हैं
मेरी रूह की अर्थी पर अपने इश्क़ की सेज सजाते हैं
वो मेरे जिस्म को नोच कर, चीर कर, मार कर, काट कर इसे इश्क़ बताते हैं
वो दरिंदा मुझे बाहर आबरू संभालने का सबक सिखाता है
हां वो ऐसे ही इश्क़ जताता है
वो खुद को मर्द बताता है
वो मुझको बस एक मामूली औरत बताता है
वो यूँ चूटकियाँ बजाके अपनी फरमाइशें बतलाता है
हां वो मेरा पति कहलाता है
हां वो दुनिया को तो यही बताता है
वो सुबह- शाम, दिन - रात अपनी चलाता है
हां वो इसी तरह इश्क़ जताता है
शादी ने दिए रिश्ते को नहीं जिस्म को अपनाता है
हां वो मेरा पति कहलाता है
वो यूं ही इश्क़ जताता है...




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