दिल की हर एक धड़कन
दिल से लिए फैसलों का एहसास कराती है
शायद इसलिए मुझे तेरी याद हर पल सताती है...
चल दिल को बुद्धू कह कर
दिमाग को बुद्धू बनाते है
बेकाबू दिमाग हो जाता है
दिल तो कभी काबू में कहां रहा है
हां मैंने तुझे मेरे सपनों की तरह
मेरे दिल से चुना है
चल आज खुद ही ख़ुदसे प्यार करते हैं
इस नामी दुनिया में खुदको थोड़ा बदनाम करते हैं
उड़ जाए परिंदा तब बवाल करते हैं ये लोग
जो कैद में है उसपे भी सवाल करते हैं
चल हारते है इस दुनिया से
और जीत खुद की खुद से करते हैं
आँखों पे अब क्या मरना
नज़रिये पे भी तो मरते हैं
सपने छोटी आँखो में भी तो बड़े पलते हैं।
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