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कविता

Jyoti Giri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब्द नहीं भाव होते हैं
        
                                                    
                            
तुकबंदी नहीं घाव होते है,
मन पर लगते
और कागज पर उतार दिये जाते हैं
कोरे पन्ने पर स्याह दर्ज करती है
एक-एक प्रहार को
जो वक्त की मार, ज़माने की कटार
और शब्दों के बाण होते हैं
बहुत कुछों को तोड़कर
उन्हीं भावों को मरोड़कर
अक्षरों को जोड़कर
एक कड़ी में जुड़ते और निखरते हैं
केवल भाषा का नहीं
भावों का प्रकाण्ड समझ सकता है
जो शब्दों को टटोलता
और फिर बोलता है
कविता शब्द नहीं भाव होते हैं,
केवल तुकबंदी नहीं किसी के घाव होते हैं।।।



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